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| Special Cover issued by India post on 18.07.2019 |
हमारे
देश में जितनी विविधता है, उतनी ही मान्यताएं और
रीति-रिवाज भी। ऐसा ही एक मंदिर
तमिलनाडु के कांचीपुरम में
स्थिति है। इस मंदिर का
नाम है भगवान वरदराजा
स्वामी मंदिर। वराधराजा पेरूमल मन्दिर को लोकप्रिय रूप से हस्तागिरि मन्दिर या अट्टियूरन के नाम से भी जाना जाता है। मन्दिर को भगवान विष्णु की याद में बनवाया गया था।यहां भगवान अती वरदार की मूर्ति भक्तों
को दर्शन देने के लिए 40 साल
में एक बार कुछ
दिनों के लिए जल
समाधि से बाहर निकलती
है।
तीन जुलाई 2019 इस मूर्ति को
मंदिर के पवित्र तालाब
से बाहर निकाला गया और इसी के
साथ तमिलनाडु का प्रसिद्ध कांची
अती वरदान महोत्सव शुरु हुआ। इस अनोखे मंदिर
में लोगों की अपार श्रद्धा
है। यही वजह है कि भगवान
अति वरदार भले ही 40 वर्ष तक जल समाधि
में रहते हों, लेकिन पूरे साल इस मंदिर में
भक्तों की भीड़ जुटती
है।
इससे
पहले वर्ष 1979 में भगवान अति वरदान ने मंदिर के
पवित्र तालाब से बाहर आकर
भक्तों को दर्शन दिए
थे। 40 वर्ष बाद जब भगवान अति
वरदार मंदिर के पवित्र तालाब
से बाहर निकलते हैं।भगवान अति वरदार केवल 48 दिनों तक भगवान श्रद्धालुओं
को दर्शन देंगे। 19 अगस्त को भक्तों को
अंतिम दर्शन देने के बाद भगवान
अति वरदार 20 अगस्त को दोबारा मंदिर
के पवित्र तालाब में जल समाधि ले
लेंगे। इसके बाद इनके दर्शनों के लिए फिर
40 साल का लंबा इंतजार
करना पड़ेगा। ऐसे में मान्यता है कि बहुत
किस्मत वाले लोग ही इनके दर्शन
कर पाते हैं।
इसे लेकर कई तरह की बातें प्रचलित हैं:
इसे लेकर कई तरह की बातें प्रचलित हैं:
पहली
ये है कि वर्षों
पहले मंदिर के एक पुजारी
को भगवान ने नींद में
दर्शन दिए और उनसे कहा
कि उन्हें पानी में समाधी दी जाए।
दूसरी
बात ये है कि
इस भगवान की इस मूर्ति
को उस वक्त बनाया
गया था, जब मंदिर का
जीर्णोद्धार शुरू हुआ था। जीर्णोद्धार कार्य पूरा होने के बाद मूर्ति
को पानी में उतार दिया गया था। गौरतलब है कि भगवान
अति वरदार की मुर्ति अंजीर
के पेड़ की लकड़ी से
बनी हुई है।
अन्य स्रोतों
से कहते है इस मूर्ति को भगवन ब्रह्माजी ने भगवन विश्वकर्माजी से बनवाया था ,कहते हैं
सतयुग में ब्रह्माजी न भग्वान विश्वकर्माजी से ,भग्वान विष्णु
की की चार मुर्ति बनवाई थी, जिसमे
ये मुर्ति आदिवक्ष से बनवाई, जिसे
हम गुलेर(अंजीर) के पेड़ के
नाम से भी जन्ते हैं। ये मूर्ति गर्भगृह की मुख्य मूर्ति
थी।ये मंदिर कांचीपुरम मैं 93000 वर्गफुट में बना हुआ है।यहाँ मन्दिर के साथ एक सरोवर(कल्याणी) भी है और सौ स्तम्भ का एक मन्दिर भी है।यह कहा जाता है16 वीं सदी तक सब ठीक चल रह
गया उस समय पर जब विदेशी आक्रमणकारियों ने हिन्दू मंदिरों को अपना निशाना बनाना
शूरु किया उस समय बहूमुल्य मंदिरों को बचाने का अभियन शूरु हुआ……..
7 facts
about Kanchipuram’s Athi Varadar : Youtube
The Compiled Facts About Kancheepuram's Athi
Varadar temple
From Kancheepuram Varamahalakshmi Silks: Youtube

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